भारत में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 124(2) में स्पष्ट रूप से कहा गया है, जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति और कार्यकाल से संबंधित है। यहाँ एक विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत, सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक पद पर बना रहता है। इस आयु के बाद विस्तार या पुनर्नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है। 2. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से तुलना: जबकि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, अनुच्छेद 217(1) के तहत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। 3. सेवानिवृत्ति के बाद के अवसर: सेवानिवृत्ति के बाद, सर्वोच्च न्यायालय के कई न्यायाधीशों को निम्न पदों पर नियुक्त किया जाता है: न्यायाधिकरणों के अध्यक्ष या सदस्य (जैसे, एनजीटी, कैट) आयोगों या समितियों के प्रमुख (जैसे, विधि आयोग, एनएचआरसी) लोकपाल, यूपीएससी, या अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थ 4. सेवानिवृत्ति के लिए अलग-अलग आयु क्यों है? सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए उच्च सेवानिवृत्ति आयु का उद्देश्य है: अनुभवी कानूनी दिमागों को उच्चतम स्तर पर लंबे समय तक बनाए रखना न्यायिक निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित करना उच्च न्यायालयों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं और न्यायाधीशों को पदोन्नति स्वीकार करने के लिए आकर्षित करना निष्कर्ष: भारत के सर्वोच्च न्यायालय का एक न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होता है। सेवानिवृत्ति के बाद, वे अन्य कानूनी या अर्ध-न्यायिक भूमिकाओं में काम कर सकते हैं, लेकिन फिर से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नहीं।
Discover clear and detailed answers to common questions about सुप्रीम कोर्ट. Learn about procedures and more in straightforward language.